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नितेश की रचना :- ...और मैं जिन्दगी से हार गया

बात करते हैं जिंदगी के उस पारी की
जब हमने भी आईआईटी जेईई की तैयारी की

जिम में टॉप करने का बुखार छाया था
इसलिए एक कोचिंग इंस्टिट्यूट में आया था

स्टेटयूमेट्री यूनिट डायमेंशन से हमारा सफर शुरू हुआ
टीचर के इंस्पिरेशनल बातों ने हमारे दिल को छुआ
धीरे-धीरे चैप्टर्स का लेवल चढ़ता गया और हम पर प्रैसर और भी बढ़ता गया

पता चला जब टीचर ने केमिस्ट्री में आयनिक पढ़ाया
उधर फिजिक्स में रेशनल ने भी खूब डराया

मैथ्स भी कहां पीछे रहने वाला था क्योंकि
बायोनोमियल से पड़ा हमारा जो पाला था

सीट्स मॉड्यूल और बुक से फुर्सत कहां थी
क्लास छोड़ने लगे क्योंकि असली मुसीबत वहां थी

जब ऐलेवन्थ टाॅप हुआ तो टॉप करने का सपना ही टूट गया
क्योंकि एनालिसिस करने पर पता चला बहुत सा टॉपिक ही छूट गया

टेस्ट में मार्क्स सिंगल डिजिट में आने लगे
और यह बात हम अपने पेरेंट्स से छुपाने लगे

धीरे-धीरे बोर्ड एग्जाम भी आने लगा
फेल होने का डर अब हमें सताने लगा

फिर आ गया वह जेईई एडवांस का डेट
बरसों से कर रहे थे हम जिस का वेट

एग्जाम देने के बाद दिल में विश्वास जगा
कोई IIT मिल जाएगा दिल को ऐसा लगा

आखिर रिजल्ट का वह शुभ दिन भी आ गया अपना स्कोर देख कर मेरा सर चकरा गया

जनरल का कटऑफ मेरे अश्कों के पार गया और आखिर में जिंदगी से मैं हार गया... !

         नितेश मिश्रा
मानित,भोपाल | 03/02/2018(शनिवार)
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