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गिद्धौर बाजार में सौंधी खुशबु बिखेर रहा मुसो हलवाई का बनाया तिलकुट


Gidhaur.com (विशेष) : इस खबर को लिखने बैठा हूँ तो करीब दो घंटे शेष हैं नव वर्ष के आगमन में. घड़ी की सुईयां बारह पर जाते ही अंग्रेजी कैलंडर के नए वर्ष 2018 का आगमन हो जाएगा.

वर्ष 2017 के 31 दिसंबर यानि आज रविवार को गिद्धौर बाजार में काफी चहल-पहल देखी गई. प्रखंड मुख्यालय होने के साथ 8 पंचायतों के विभिन्न छोटे-बड़े गावों को अपने में समाये गिद्धौर पौराणिक समय में चंदेल शासक का राज्य हुआ करता था. ऐसे में लाजमी है कि नव वर्ष के आगमन के उपलक्ष्य पर बाजार में खरीददारी करने आए लोगों के भीड़ की संख्या काफी अधिक होगी.

पूजा सामग्री सहित अन्य सामानों की अपेक्षा गिद्धौर बाजार में एक सौंधी सी खुशबु ने सभी खरीददारों को अपनी ओर आकर्षित किया. जी हाँ, गिद्धौर के लॉर्ड मिंटो टावर चौक के इर्द-गिर्द दर्जनों की संख्या में दुकानों व ठेलों पर बिक रहे तिलकुट की सौंधे खुशबु ने बरबस ही सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा. 

चूँकि जनवरी के आगमन के साथ ही मकर संक्रांति की तैयारियां भी शुरू हो जाती है. तो नव वर्ष के अवसर पर भगवान को भोग लगाने प्रसाद स्वरुप लोगों ने तिलकुट की भी खूब खरीददारी की. इस व्यवसाय से लगे दुकानदार तिल से बने सामग्री के निर्माण में जुट गये हैं. सुबह से देर रात तक तिलकुट बनाने का काम जारी रहता है. कारीगर दिन-रात मेहनत कर तिलकुट व तिल से बने अन्य सामग्री का निर्माण कर रहे हैं. ठंड के मौसम में तिल व तिल निर्मित सामग्री लोगों के सेहत के लिए लाभदायक मानी जाती है. अगर आप इधर सामान्य दिनों में गिद्धौर के लॉर्ड मिंटो टावर चौक से गुजरें, तो तिलकुट की सौंधी महक आपको जरूर रूकने पर मजबूर कर सकती है. 

यूँ तो गिद्धौर में दर्जनों कारीगर तिलकुट का निर्माण करते हैं लेकिन यहाँ के मुसो हलवाई के तिलकुट का स्वाद और तिल की सौंधी सुगंध लोगों को सम्मोहित सी कर लेती है. मुसो जी पिछले चार दशकों से तिलकुट निर्माण का व्यवसाय कर रहे हैं. उच्च गुणवत्ता के तिल, गुड़ व अन्य सामग्रियों का इस्तमाल कर चीनी, गुड़ और खोया के तिलकुट मुसो जी द्वारा बनाए जाते हैं. यदि आप गिद्धौर अथवा इसके आसपास के क्षेत्र के बाशिंदे हैं और अभी तक किसी भी दिन अथवा मकर संक्रांति के अवसर पर चूड़ा-दही के साथ मूसो हलवाई जी द्वारा निर्मित तिलकुट नहीं खाए हैं तो आपने अब तक गिद्धौर की सौंधी मिट्टी का स्वाद नहीं चखा और अगर आपने कभी ना कभी मूसो जी का तिलकुट खाया होगा तो उनके बनाए तिलकुट के लज़ीज़ स्वाद को बरबस ही महसूस कर सकते हैं. चार दशकों से भी अधिक समय से तिलकुट निर्माण का कार्य कर रहे मूसो जी क्षेत्र के सर्वप्रसिद्ध तिलकुट विक्रेता हैं. गिद्धौर के परम्परानुसार परिजनों एवं बेटियों के ससुराल मकर संक्रांति के मौके पर प्रत्येक वर्ष यहाँ से चूड़ा-दही के साथ-साथ तिलकुट भी भेजा जाता है.

बदलते समय के साथ कई अन्य तिलकुट विक्रेता भी बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने में लगे हैं. कुछेक तो लाउडस्पिकर पर प्रचार कर तिलकुट बेचा करते हैं. लेकिन गिद्धौर एवं क्षेत्र में अपनी तिलकुट का स्वाद सभी को चखा चुके सबसे पुराने तिलकुट विक्रेता श्री मूसो हलवाई जी को ख़ासी मशक्कत नहीं करनी पड़ती. आप अगर इस बार नव वर्ष या मकर संक्रांति के मौके पर गिद्धौर में हैं तो मूसो जी के तिलकुट के जायके का लुत्फ़ अवश्य उठाइए और अगर गिद्धौर से बाहर हैं तो बस अपनी तृष्णा को शांत करने का विफल प्रयास कीजिए.
नववर्ष की अशेष शुभकामनाओं सहित!

सुशान्त साईं सुन्दरम
गिद्धौर       |       31/12/2017, रविवार
www.gidhaur.com