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कितना सार्थक है तीन तलाक?

Gidhaur.com (नजरिया): शायरा बानो एक मुस्लिम महिला जिसने आगे आकर इस कुरीति के लिए गुहार लगाई । इनकी बुलंद आवाज़, और इनकी नीडरता ने इन्हें आज एक मिसाल बना दिया। नारी शक्ति की जीत हुई। लोकसभा में तीन तलाक बिल पास हुआ । मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग इस बिल के खिलाफ थे ओर शायद है भी , ये बहस का मुद्दा नही था, ये एक कुरीति थी जिसे जड़ से उखाड़ फेंकना था । आज ये सफल हुआ। अब महिलाओं को जलील और बेघर होने से राहत मिला । आने वाले पीढ़ियों को इस कुरीति से छुटकारा मिला। जो इसके खिलाफ है, वो बेशक खिलाफ रहे , अब उनके विरोध करने या क्रोध जताने से कोई फायदा नही है, जो कुरीति महिलाओं को तकलीफ दे रही थी उस कुरीतियों से राहत क्यों न मिले,क्यों महिलाओ के विकसित होने से कुछ लोग इतने बौखला उठते है। कहते हो देश आगे बढ़ाना है फिर बिना माहिला के विकशित हुवे कैसे आगे बढ़ पाओगें। मत भूलो की महिला भी इस देश मे आती है। बिना महिला के जो तरक्की सोच रहे हो, वो सोच ही बनकर रह जायेगी। अब वो दिन भी दूर नही जब महिलाएं भी अपना परचम लहरायेगी। जो नारी शक्ति का मजाक उड़ाते है। वो शायरा बानो की मिसाल देख ले और महिलाओ को किसी भी तरीके से कम न आंके।

(स्नेहिल भारद्वाज)
देवघर     |     30/12/2017 (शनिवार)
Edited by- Abhishek Kumar Jha
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