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Exclusive : यहां जानिए कौन हैं बिहार के Top-11 लोकसभा MP

Gidhaur.com (विशेष) : लोकसभा चुनाव 2014 में बिहार से जीत कर आये सांसदों में से किसने अपने क्षेत्र की जनता का दिल जीता तो कौन नाकाम रहा, इस बात को आप जरूर जानना चाहेंगे. इसी बात को लेकर सासंदों के कार्यकाल, व्यवहार, लोकप्रियता सहित क्षेत्र की जनता के प्रति व्यवहार का एक सर्वेक्षण दिल्‍ली से प्रकाशित होने वाली पत्रिका फेम इंडिया और एशिया पोस्‍ट की ओर से किया गया. सर्वे में सांसद से संबंधित जनता से पांच सवाल पूछने के साथ लोकसभा की साइट पर उपलब्ध चार प्रमुख डाटा समेत कुल नौ बिंदुओ को शामिल किया गया था. इनमें उनकी सदन में उपस्थिति, बहस में भागीदारी व जनहित के प्रश्न उठाने, निजी विधेयक लाने, सांसद निधि का उपयोग सहित क्षेत्र की जनता के लिए सुलभता व मददगार, लोकप्रियता और छवि को प्रमुख माना गया है. सर्वे में पाया गया है कि कई सांसदों के कार्य बहुत अच्छे हैं तो कुछ के मानकों से नीचे आये. उपस्थिति और सांसद विकास निधि के खर्च के आंकड़ों में कई सांसदों का प्रदर्शन तो काफी अच्छा रहा है, लेकिन लोकप्रियता, छवि और मददगार होने के मामले में वे पीछे रह गए हैं. सर्वे में बिहार के वैसे लोकसभा सांसद, जो वर्तमान में भारत सरकार में मंत्री हैं, उन्हें शामिल नहीं किया गया है. यहाँ सर्वे के मुताबिक हम आपको टॉप-11 लोकसभा सांसदों के बारे में बताएंगे.
1. पप्पू यादव (मधेपुरा)
सर्वे मानता है कि पप्‍पू यादव एक ऐसे सांसद हैं, जो पूरे जुनून के साथ भ्रष्ट सिस्टम के विरुद्ध लगातार संघर्षरत हैं. वह सड़क से संसद तक आम आदमी की हर मांग को मजबूती से उठाते हैं. इन्‍हें गरीबों, बीमारों, छात्रों और हर आम आदमी की समस्याओं का ख्याल है और उसे अपनी पूरी क्षमता से दूर करने की कोशिश करता है. राज्य के किसी भी कोने मे होने वाली अपराधिक घटना में पीड़ित परिवार के साथ तन, मन, धन से खड़ा हो, उसे सहायता प्रदान करते हैं. कोई उन्हें मसीहा मानता है तो कोई रॉबिन हुड, किसी की नज़र में वे विद्रोही हैं तो किसी की नजर में शांत.
दिल्ली के बलवंत राय लेन स्थित अपने सरकारी आवास और पटना आवास को पप्पू यादव ने जिस तरह से इलाज के लिये आने वाले असहाय लोगों के लिए खोल रखा है, वो मानवता की एक अनूठी मिसाल है. यहां लोगो को इलाज के साथ-साथ रहने और खाने की पूरी व्यवस्था सासंद पप्पू यादव खुद अपनी देख-रेख में करवाते हैं. एक बड़े किसान परिवार से आए पप्पू यादव के दादा स्वतंत्र भारत में खुर्दा पंचायत के पहले मुखिया थे. उनके पिता चंद्रनारायण प्रसाद शिक्षा व समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य करने के साथ ही आनंदमार्ग के प्रमुख प्रचारक रहे हैं. पप्पू यादव की पढ़ाई सुपौल, आनंदपल्ली और आनंदपुर, भागलपुर में हुई. वे पहली बार 1990 में निर्दलीय विधायक चुने गए.
2. नित्यानंद राय (उजियारपुर)
नित्यानंद राय बिहार में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान में उजियारपुर से लोकसभा सांसद है. सर्वे ने जाना कि साफ सुथरी छवि वाले नित्यानंद बेहद सुलझे हुए और सरल व्यक्ति हैं.  बिहार की जातिगत राजनीति का काट बखूबी जानने के कारण ही उन्हें बिहार भाजपा की कमान सौंपी गई है. नित्यानंद राय कई बार बिहार विधानसभा के सदस्‍य भी रहे हैं.
नित्यानंद राय अपने संसदीय क्षेत्र उजियारपुर के विकास के लिए समर्पित नित्यानंद राय के द्वारा क्षेत्र में कई तरह के कार्य किए गए हैं, इनमें पोलियो से प्रभावित बच्चों को मुफ्त मेडिकल ट्रीटमेंट और एजुकेशन का पूरा खर्च उठाना, अनाथ बच्‍चों को गोद लेकर उनकी पढाई व बेसहारा लड़कियों की शादी करवाना प्रमुख है. उन्होंने तीन सामूहिक दुष्कर्म की शिकार (नाबालिग लड़कियों) को अपनाया और भविष्य में उनकी पढाई और शादी व रोजगार की व्यवस्था की है.
3. रमा देवी (शिवहर)
बिहार से तीन महिला सांसद इस बार की 16वीं लोकसभा में प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, उन्हीं में से एक नाम है शिवहर से सांसद रमा देवी का. रमा देवी में  अपने क्षेत्र के उत्थान और जनता की सेवा के साथ उनकी समस्या ओं के लिए जो चिंता दिखती है, वो उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाने के साथ-साथ प्रभावशाली सांसदों की लिस्ट में भी जगह दिलाती है. रमा देवी अपने पति बृजबिहारी प्रसाद की राजनैतिक विरासत को आगे बढ़ा रही हैं. पति की हत्या के बाद रमा ने राजनीति में कदम रखा . रमा देवी का संसद में यह तीसरा टर्म है.
4. रंजीत रंजन (सुपौल)
सुपौल से वर्तमान सांसद और 14वीं लोकसभा में जीत कर सबसे युवा सांसदों में अपना नाम दर्ज करवा चुकी रंजीत रंजन का जन्म 7 जनवरी 1974 को मध्य प्रदेश के रीवा में हुआ, रंजीत का परिवार कश्मीर से मध्य प्रदेश आया था. मूल रूप से कश्मीरी पंडित रंजीत के परिवार ने आगे चल कर सिख धर्म को अपना लिया. रंजीत मशहूर लॉन टेनिस खिलाड़ी भी रही है. वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने के साथ-साथ पार्टी की सेक्रेट्री भी हैं. 2014 लोकसभा चुनाव में रंजीत 3,32,927 वोट से जीत दर्ज करके विजेता बनी और यह आंकड़ा उनकी लोकप्रियता दिखाने के लिए काफी है. लोकसभा में वह कांग्रेस की अधिक मुखर और दिखने वाले चेहरों में से एक है. पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें ‘फायर ब्रिगेड’ की उपाधि दी हुई है.
5. जनार्दन सिंह सिग्रीवाल (महाराजगंज)
जनार्दन सिंह सिग्रीवाल महाराजगंज से लोकसभा सांसद है. बतौर सांसद यह उनका पहला टर्म है, लेकिन बिहार और राजनीति से इनका जुड़ाव पुराना रहा है, ये सक्रिय रूप से 2000 में पहली बार जलालपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने थे . जनार्दन सिंह सिग्रीवाल को बेहद संतुलित और संवाद कुशल राजनेता माना जाता है. सांसद बनने के बाद वे क्षेत्र के विकास के लिये लगातार प्रयास कर रहे हैं. क्षेत्र में स्वास्थ्य व कौशल विकास केंद्र स्थापित करने से लेकर महाराजगंज और एकमा में रेलवे स्टेशनों को अपग्रेड करने, बिहार में एनएच 101 बनाने, महाराजगंज संसदीय क्षेत्र में सब्जियां और फल आधारित खाद्य उद्योग स्थापित करने,  कैरियर परामर्श केंद्र बनाने आदि तक के लिये संसद में चर्चा करते रहे है.
उनके द्वारा 10 बिल भी संसद में रखे गए हैं जिनमें महाराजगंज में पटना हाई कोर्ट के द्वारा परमानेंट बेंच की मांग के साथ अनिवार्य मतदान, मैनेजमेंट बिल भी शामिल है. सदन में उनकी उपस्थिति 94% प्रतिशत है. सिग्रीवाल बिहार सरकार से श्रम मंत्री  रहते हुए 2012 में स्विट्जर लैंड के जिनेवा आईएसओ के विशेष सत्र में भाग लेने के लिए भारत की ओर से डेलिगेशन के सदस्य भी रह चुके हैं.
6. चिराग पासवान (जमुई)
बिहार के राजनीति पटल पर तेजी से उभरने वाले नामों में लोक जनशक्ति पार्टी यानी एलजेपी के मुखिया रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान का नाम भी शामिल है. कम समय में ही उन्होंने राजनीतिक गलियारों में अपनी जगह बना ली है. ग्लैमरस फिल्मी दुनिया की चकाचौंध भरे जीवन से निकल कर राजनीति और लोकसेवा की गलियों में कदम रखने वाले चिराग वर्ष 2014 में हुए 16वीं लोकसभा चुनाव में जमुई से सांसद चुने गये और अब एलजेपी की संसदीय कमेटी के प्रमुख हैं. उन्होंने न केवल अपनी पार्टी, बल्कि एनडीए गठबंधन में भी अपनी बड़ी सक्रियता दिखाई है.
चिराग पासवान ने राजनीति में आने से पहले फिल्मी दुनिया में अपनी किस्मत आजमाई है. 2011 में तनवीर खान की फिल्म ‘मिलें ना मिलें हम’ से उन्होंने अपने फिल्मी कॅरियर का आगाज किया. फिल्म ने ठीक-ठाक प्रदर्शन भी किया, लेकिन जल्दी ही उन्हें समझ आ गया कि ये एक ऐसा प्रोफेशन है जो उन्हें समाज से जोड़ने की बजाय दूर करता है. दशकों से समाजसेवा कर रहे एक दिग्गज राजनेता के पुत्र चिराग पासवान ने अपनी पहली फिल्म के साथ ही बॉलीवुड को अलविदा कह दिया और राजनीति के मैदान में कूद पड़े.
7. अश्विनी चौबे (बक्सर)
अश्विनी चौबे बिहार बीजेपी के एक ऐसे फायरब्रांड नेता हैं, जिन्होंने अपनी ईमानदारी और प्रखर राष्ट्रवादी विचारों की बदौलत राजनीति में एक अलग पहचान बनाई है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बक्सर लोकसभा सीट से आरजेडी के कद्दावर नेता जगदानंद सिंह को हराकर वे पहली बार सांसद बने. हालांकि अश्वनी चौबे की कर्म भूमि भागलपुर रही है, फिर भी उस इलाके से काफी दूर एक नई सीट से चुनाव लड़ना और करीब 1 लाख 32 हज़ार वोटों के बड़े अंतर से इसे जीतना उनकी लोकप्रियता, राजनीतिक कौशल और जादुई छवि की मिली-जुली कहानी बयान करता है.
सांसद अश्विनी चौबे सोलहवीं लोकसभा के सबसे सक्रिय सांसदों में से एक हैं. लोकसभा में अब तक उन्होंने 168 बहसों में हिस्सा लिया और 134 सवाल पूछे. इसके अलावा दो प्राइवेट मेंबर बिल भी उन्होंने लाया, जिसमें संसद परिसर में मैथिल कोकिल विद्यापति की प्रतिमा लगाने के अनुरोध से जुड़ा बिल भी शामिल है.
8. तारिक अनवर (कटिहार)
देश की राजनीति में तारिक अनवर प्रगतिशील विचारों वाले एक ऐसे मुस्लिम नेता के तौर पर स्थापित हैं, जो मृदुभाषी तो हैं ही, काफी संयमित रहते हैं और एक-एक शब्द नाप-तौलकर बोलते हैं. तारिक अनवर कभी फिजूल के विवादों में नहीं पड़ते, लेकिन जब भी उनके सामने कोई महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रश्न आता है, तो बेझिझक अपनी राय रखते हैं. तारिक अनवर का जन्म राजधानी पटना में 16 जनवरी 1951 को हुआ था. शुरुआती पढ़ाई-लिखाई भी पटना से ही हुई.
छात्र जीवन से ही वे राजनीति से जुड़ गए थे और कम समय में ही काफी लोकप्रियता हासिल कर ली थी. उनकी इसी लोकप्रियता को भांपते हुए कांग्रेस ने पहली बार 1977में उन्हें कटिहार लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का अवसर दिया, हालांकि जेपी आंदोलन और तीव्र इंदिरा विरोधी लहर के चलते उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. लेकिन अगले ही चुनाव यानी 1980 में वे पहली बार सांसद चुन लिए गए. वर्तमान में तारिक अनवर एनसीपी के सांसद हैं.
9. राजकुमार सिंह (आरा)
1975 बैच के बिहार काडर के आईएएस अधिकारी रहे आरके सिंह की मूल पहचान एक ईमानदार और मजबूत ब्यूरोक्रैट के तौर पर रही है. वे भारत के गृह सचिव भी रह चुके हैं. पहली बार वे सुर्खियों में तब आए थे, जब वे बिहार के समस्तीपुर ज़िले के डीएम थे. बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक राम रथयात्रा लेकर निकले हुए थे और बिहार से होकर गुज़र रहे थे. तब तत्कालीन लालू यादव सरकार ने आडवाणी को गिरफ्तार करने का फैसला किया. इसके बाद 30 अक्टूबर 1990 को उन्हें समस्तीपुर में गिरफ्तार कर लिया गया.
इसे भी एक इत्तेफाक ही कहेंगे कि आरके सिह ने जिस लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार किया, उन्हीं आडवाणी ने भारत सरकार में गृह मंत्री रहते हुए एनडीए-1 की सरकार में 1999 से 2004 तक राजकुमार सिंह को केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव के तौर पर नियुक्त किया. आरके सिंह को दुनिया देखने का भी भरपूर मौका मिला. अब तक वे बेल्जियम, भूटान, ब्राज़ील, चीन, इजिप्ट, फ्रांस, ईरान, इटली, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान, रूस, श्रीलंका, ब्रिटेन और अमेरिका समेत कई देशों का दौरा कर चुके हैं.
10. डॉ. संजय जायसवाल (पश्चिमी चम्पारण)
डॉ. संजय जायसवाल का परिचय अगर एक वाक्य में देना हो, तो कहा जा सकता है कि राजनीति उन्हें विरासत में और सेवा भावना संस्कार में मिली है. वे पेशे से डॉक्टर और साथ ही पश्चिमी चंपारण लोकसभा सीट से बीजेपी के सांसद हैं. उनके पिता डॉ. मदन जायसवाल भी बिहार भाजपा के कद्दावर नेता थे और 1990से 1995 तक एक बार विधायक और 1996 से 2004 तक तीन बार सांसद रह चुके थे. मदन 2004 के लोकसभा चुनाव में रघुनाथ झा से हार गए थे. फिर फरवरी2009 में उनके निधन के बाद  बेटे डॉ. संजय जायसवाल को चुनाव लड़ने का मौका मिला और उन्हें कामयाबी भी मिली. 2014 के लोकसभा चुनाव में डॉ. संजय दूसरी बार सांसद बने हैं.
11. डॉ. अरुण कुमार (जहानाबाद)
जहानाबाद लोकसभा सीट से राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के सांसद अरुण कुमार की पहचान एक जुझारू और संघर्षशील नेता की रही है. अपने जिले के मुद्दों को लेकर वे लगातार सक्रिय रहते हैं और  इलाके में उनका जनसंपर्क काफी मजबूत माना जाता है. इसी की बदौलत 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल के सुरेंद्र प्रसाद यादव को करीब 42 हज़ार वोटों से शिकस्त दी. इससे पहले 1999 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने जहानाबाद सीट से जीत हासिल की थी और इत्तिफाक से उस चुनाव में भी उन्होंने आरजेडी के सुरेंद्र प्रसाद यादव को ही पटखनी दी थी.

सांसदों के संबंध में दी गई सभी जानकारी फेम इंडिया ने एशिया पोस्‍ट के सर्वे के साथ प्रकाशित की है.

संकलन : अनूप नारायण
Gidhaur.com     |     19/11/2017, रविवार