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धर्म : जानें उस जगह के बारे में जहाँ देवी ने किया था चंड-मुंड का वध


Gidhaur.com (धर्म) : बिहार में शाहाबाद धार्मिक स्थलों के मामले में भी बड़ा ही समृद्ध है। पवित्र गंगा और सोन नद के साथ विन्ध्य पर्वत श्रृंखला से घिरे रोहतास, भोजपुर, बक्सर तथा कैमूर ये चार वर्तमान जिला पूर्व में शाहाबाद जिला था, जो आज चार भाग में विभक्त हो गया है। आर्थिक, सामाजिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण इस भूभाग में अवस्थित शक्तिपिठों का चर्चा आज जरूरी है, क्योंकि यहां के देवी मंदिरों के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व को ओ ख्याति अब तक प्राप्त नहीं हो सका है जो होना चाहिए था।
ऐसे तो यहां कई प्राचीन मंदिर अवस्थित है जिसमें मुन्डेश्वरी धाम, भलुनी धाम, ताराचंडी धाम तथा आरा के अयरन देवी मंदिर काफी महत्व रखते हैं। मुन्डेश्वरी धाम कैमूर पहाड़ी पर अवस्थित है, जहां एनएच दो और ग्रैन्डट्रंक रेलवे लाइन पर बोधगया एवं वाराणसी के बीच मोहनिया से करीब बीस किलोमीटर दूर है। यह कभी विशाल मंदिर था, जिसे मुस्लिम आक्रमणकारियों ने ध्वस्त कर दिया था। पहाड़ी पर बचे एक कमरे में हीं माँ मुन्डेश्वरी तथा शिवलिंग अभी अवस्थित है। ऐतिहासिक तथा धार्मिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता तथा आश्चर्यजनक बात यह है कि बकरे की बलि बिना खून बहाये दी जाती है। पंडित मंत्र पढ़कर चावल अक्षत बकरे पर फेंकते हैं और बकरा बेहोश हो जाता है। पुन: मंत्र के साथ चावल अक्षत फेंकने पर बकरा उठकर खड़ा हो जाता है। पहाड़ी के नीचे पर्यटन विभाग के साथ ही निजी होटल भी है।
माँ ताराचंडी धाम एनएच दो से सटे हुए है जो सासाराम रेलवे स्टेशन से मात्र पांच किलोमीटर दूर है। जहां अन्तरप्रान्तीय बस सेवा के साथ ही रेलवे स्टेशन पर दिल्ली कोलकाता रूट पर चलने वाली प्रायः सभी ट्रेनो का ठहराव है। कहा जाता है कि देवी ने चंड नामक दैत्य का वध यहीं किया था, जबकि मुन्ड नामक दैत्य की मुन्डेश्वरी में।
वहीं मोहनिया आरा एनएच के किनारे अवस्थित भलूनी धाम का भी बड़ा ही धार्मिक महत्व है | ऐतिहासिक और धार्मिक ग्रन्थ बताते हैं कि भगवान राम भी यहां आकर माँ की पूजा किये थे। वर्तमान समय में एनएच की स्थिति बहुत ही खराब है। इसलिए सासाराम आरा मार्ग से बिक्रमगंज से नटवार बाजार होते हुए बड़ी असानी से पहुंचा जा सकता है। इन सभी शक्तिपिठों के बारे में मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत जरूर पुरी होती है।

(अनूप नारायण)
Gidhaur.com | 22/09/2017, शुक्रवार