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जमुई जिला प्रशासनिक वेबसाइट पर अब बाबा कोकिलचंद और गिद्धौरिया ग़ज़ल भी

Gidhaur.com (न्यूज़ डेस्क) : कोकिलचंद के 700 सालों के इतिहास को अब दुनियाभर के लोग भी जान सकेंगे। जी हां। बाबा कोकिलचन्द के महीमा का बखान न सिर्फ जुबानी है बल्कि जिलाधिकारी डॉ. कौशल किशोर की पहल पर बाबा कोकिलचंद से संबंधित सभी जानकारियां और इतिहास जमुई जिला प्रशासनिक वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया गया है।

वेबसाइट पर 14 पन्नों में अक्षरित है इतिहास
जिले की प्रशासनिक वेबसाइट jamui.bih.nic.in पर 14 पन्नों में बाबा कोकिलचंद का इतिहास व कहानी अपलोड किया गया है। हलांकि सुनने मे आता है कि इसमें कहीं-कहीं छोटी छोटी बाधाएँ आई, पर अंततः बाबा के इतिहास को जमुई जिला के प्रशासनिक वेबसाइट पर स्थान मिलना गंगरा सहित जिलाभर के लोगों के लिए बहुत ही गौरव की बात है।
इनका है अहम योगदान
दरअसल, बाबा का इतिहास वेबसाइट पर लाने की पहल माननीय जिलाधिकारी द्वारा किया गया था। पर इन तमाम इतिहास का संग्रहन गंगरा निवासी शिक्षक चुनचुन कुमार ने किया है। इनके अथक प्रयास से ही आज बाबा के महीमा का बखान न सिर्फ जुबान पर है बल्कि हर उस शख्स के जेहन मे है जो जिला प्रशासनिक वेबसाइट को देखा करते हैं।
(ज्योतिंद्र मिश्र)
गिद्धौरीया बोली का भी है बखान
ज्योतिंद्र मिश्र का नाम तो आप सबको पता ही है। जी बिलकुल गिद्धौरीया बोली की संज्ञा इनसे अभिन्न थोड़े ही न है। इनके अल्फाजों और कुछ संग्रहण को भी वेबसाइट पर उसी श्रेणी में तीसरे नंबर पर अंकित कराया गया है।
गंगरा गाँव हुआ गौरवान्वित, नही बदली गांव की सूरत
ग्रामीणों ने शिक्षक चुनचुन कुमार व जिलाधीकारी महोदय के प्रति अपना हृदयाभार व्यक्त किया है। देखा जाए तो जमुई जिला प्रशासनिक वेबसाइट ने गंगरा गांव को उच्च स्थान पर लाकर खड़ा तो कर दिया पर यह गाँव आज भी मूलभूत सुविधाओं के विकास  हेतु प्रतिनिधियों से गुहार लगा रहा है। लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेगते और अगर रेगते है तो खूजली भी होनी चाहिए न!

Gidhaur.com    |    19/09/2017, मंगलवार